We are on a Mission to Educate Rural India

Welcome to Naya Vichar Nai Urja Foundation

121 करोड़ की आबादी रखने वाले भारत देश में आज भी विभिन्न वर्गों/समुदायों / निर्वल समूहों के समक्ष भरण-पोषण की समस्याएँ विद्यमान हैं |देश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम/ नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार लागू हो जाने के बाबजूद भी आज भी देश के नौनिहाल रोजी-रोटी के लिए ईंट भटटों पर काम करने के लिए मजबूर हैं | आज भी नौनिहाल होटलों में बर्तन माँजने को मजबूर हैं...आज भी नौनिहाल फेरी लगाने को मजबूर हैं | आज भी कूड़ा-पन्नी बीनने को मजबूर हैं |

किसी भी देश की प्रगति का पैमाना उस देश में रहने वाले लोगों की शिक्षा पर निर्भर करता है, जिन देशों में शिक्षा का स्तर उच्च है...वहाँ बेरोजगारी, भुखमरी आदि समस्याएँ नगण्य हैं...तथा वे देश नित नयी-नयी उपलब्धियाँ हासिल कर रहें हैं तथा दुनिया में अपनी कामयाबी की विजय पताका फहराकर जश्न मना रहें हैं |

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*कोई इनको पेन रखना सिखाये....!!!*

पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 लाल बहादुर शास्त्री ने सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की प्रेणना दी, स्व0 राजीव गांधी ने लोगो को विज्ञान और तकनीक का प्रयोग करने की प्रेणना दी, वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीे प्रत्येक  नागरिक को स्वच्छता का सन्देश दे रहे हैं, पर लगता है  जैसे शिक्षा क्रान्ति/ कलम क्रान्ति हम लोगों ने स्टार्ट की  अभी किसी युग पुरुष को आगे आना है जो भारत के जन-मानस को अपनी जेब में अथवा अपने बैग (पर्स) में एक अदद कलम (पेन) रखने के लिए प्रेरित करे। क्योंकि अपने पास पेन न रखना भारतीयों की विशेषता है। कहते हैं कलम में वो ताकत है जो किसी की तक़दीर बदल दे, दो देशों का नक्शा बदल दे, ज़िंदा को मुर्दा कर दे और निर्जीव को सजीव कर दे। पर ये मनोविज्ञान समझ के परे है कि लोग इस ताकत को अपने पास रखना नहीं चाहते, या फिर कहें उनको पता है कि ये महत्वहीन वस्तु कहीं भी प्राप्त हो जायेगी। आज पूर्वान्ह की घटना है, मैं बैंक की एक शाखा में अपने किसी काम से गया था, काउंटर पर खड़े होकर मैं फ़ार्म भरने लगा, अचानक मुझे लगा कि मुझे तीन चार लोग घेरे हुए हैं और मेरे लिखने को बड़े ध्यान से निहार रहे हैं, चारो आपस में अपरिचित थे, पर मैं उनकी आँखों के लिए एक मात्र निहार-बिंदु था, मुझे असहज महसूस हुआ कि ये सब मुझे इतनी शिद्दत से घूर क्यों रहे हैं, सहसा उन तीनों पुरुष तथा एक महिला ने एकसाथ बोला भाईसाब अपना काम करके पेन दे दीजियेगा, मैं अवाक था, टाइमिंग चारों की जबरदस्त थी, ऐसा लगा कि मेरी ओर चार गेंदबाजों ने एक साथ बाउंसर फेंक दी हो। अब मैं किसकी वाली बाल से बचूँ। सहसा याद आया कि मैं तो लोक सेवक हूँ, ऑफिस में एक साथ कई सवाल दा